आवास बेचने में करोड़ों का हुआ खेल विरोध करने पर करा दिया ट्रांसफर
प्रबंधन ने सुधारी भूल विरमित आदेश को लिया वापस
भूली। भूली एशिया का सबसे बड़ा कोयला श्रमिक कॉलोनी में शुमार है। लेकिन अब बीसीसीएल के आवासों पर बाहरी लोगों का कब्जा है। जिसको लेकर प्रबंधन करीब डेढ़ दशक से विकास कार्य को अनदेखा करता रहा है। प्रबंधन का यही निर्णय भूली में आवास बेचने वालों के लिए सुनहरा अवसर मिल गया। श्रमिक आवास के साथ उच्च पदाधिकारी और चिकित्सकों के लिए सी टाइप ओल्ड बी टाइप के आवास को भी बेच दिया गया।
बीटीए में कार्यरत कर्मी परशुराम चौहान ने बताया कि भूली में आवास बेचने वालों ने सी टाइप बी टाइप के आवास को लाखों में बेचा और यह करोड़ों का खेल है। जिसमें ट्रेड यूनियन के लोग संलिप्त हैं।
परशुराम चौहान ने बताया कि आवास बेचने के मुद्दे पर उन्होंने प्रबंधन से शिकायत भी की थी। जिसके बाद कथित लोगों ने प्रबंधन को भ्रमित का मुझे बीटीए से विरमित करने का आदेश निकलवा दिया था। जब प्रबंधन को सच्चाई का पता चला तो मेरा विरमित आदेश के निर्णय को वापस लिया गया।
परशुराम चौहान ने कहा कि भूली में आवास बेचने के खेल में शामिल लोगों का जल्द ही पूरी साक्ष्य के साथ भंडाफोड़ किया जाएगा।
आपको बता दें कि परशुराम चौहान को 12 से 18 दिसंबर के बीच ही सी बी क्षेत्र में योगदान का आदेश निकाला गया था और फिर 17 दिसंबर को परशुराम चौहान बीटीए में अपना योगदान दिया।
चर्चा यह भी
भूली में अगर किसी को आवास चाहिए तो पैसा से सी टाइप या बी टाइप के आवास भी उपलब्ध हो जाता है। जिसमें कई बार बीटीए में कार्यरत कर्मियों का नाम भी तैरता है जो अपने आप को प्रबंधन का खास बताता है।
चर्चा है कि आवास के साथ भूली में सड़क किनारे दुकान लगाने में भी इनकी सक्रियता है। हालही में बुधनी हटिया के समीप एक दुकान लगाने को लेकर पैसे के लेनदेन में विवाद के बाद उक्त दुकान लगाने वाल पर दबाव बनाने के लिए कथित महिला का सहारा भी लिया गया था।
भूली का आवास मुद्दा बन जाता है खास
भूली का आवास मुद्दा सिर्फ लाखों दाम पर बेचने खरीदने तक के लिए चर्चा में नहीं रहता । बल्कि राजनीतिक तौर पर चुनाव के दौरान खास मुद्दा बन जाता है। आने वाले कुछ माह में धनबाद नगर निगम का चुनाव संभावित है। ऐसे में बीटीए कर्मी परशुराम चौहान का आवास मुद्दा पर ट्रेड यूनियन को घेरने और प्रबंधन की संलिप्तता का सवाल नया मोड ले सकता है।

