राजनीति के पुरोधा थे अटल जी – प्राची विश्वकर्मा

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अटल बिहारी वाजपेयी के जयंती अवसर पर प्राची विश्वकर्मा का विशेष आलेख
भूली। अटल बिहारी वाजपेयी का 25 दिसंबर 2025 को 101 वीं जयंती है। इस अवसर को अटल पखवारा के रूप में देशभर में मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवा वर्ग को अटल जी के विचारों व सिद्धानों से अवगत कराना है। अटल जी भारत के आजादी के भारत छोड़ो आंदोलन से सक्रिय हुए। पत्रकारिता की और फिर सक्रिय राजनीति का हिस्सा बने। दो बार भारत का प्रधानमंत्री बने और अपने सांसद और राज्यसभा में दो बार प्रतिनिधित्व करने के दौरान अपने विचारों से देश को गति देने का काम किया। भारत को विश्व पटल पर परमाणु परीक्षण के माध्यम से शक्ति दिलाई तो चतुर्भुज सड़क योजना से देश के बड़े महानगरों को एक सूत्र में विकास के पटरी पर दौड़ाया। अटल बिहारी वाजपेयी महिला सशक्तिकरण को अलग पहचान दी। अटल जी घरेलू मामलों को जितनी गंभीरता से लेते थे उतने ही गंभीरता से विदेशी मामलों को देखते थे। भारतीय राजनीति में कठोर निर्णय लेने वाले अटल जी व्यवहारिक जीवन में उतने ही कवि हृदय व्यक्तित्व के धनी थे।
वर्तमान राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी जैसा प्रतिनिधित्व करने वाला नहीं है जिसका विरोधी भी कायल हो। वे स्वस्थ राजनीति के परिचायक बने रहे। अपने विचारों और सिद्धानों के साथ अटल जी ने जो लकीर भारतीय राजनीति me खींच दी इसे आन वाले कई दशकों तक उस लकीर को कोई छोटा नहीं कर सकता। आज के युवा पीढ़ी को अटल जी के बारे में जानना चाहिए और अटल जी को बारीकी से पढ़ना चाहिए।
अटल बिहारी वाजपेयी जी के 101 वीं जयंती अवसर पर शत शत नमन।

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