डॉ पूनम शर्मा रचित कविता नूतन वर्षानुवर्ष

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नूतन वर्षानुवर्ष (शीर्षक)

जय गणेश , काटो कलेश
दुःख रहे न शेष, जय हो !
नववर्ष का आगमन,
शुभ प्रभात के साथ हो रहा है,
खुशियों ने प्रवेश कर लिया है,
हमारे आंगन में,
प्रभु आशीर्वाद मुद्रा में
आकाशवाणी कर रहे हैं,
शुभ मंगलमय नव कैलेंडर वर्ष,
तिथि बदलती रहे,
खुशियां बढ़तीं रहें,
प्रभु का आभार,
हमें दो हाथ,
फरिश्तों के रूप में दिए हैं,
आपस में जुड़ कर,
हो जाते हैं चार,
हम माता पिता इसी घेरे में सुरक्षित हैं,
जब भी दलदल रूपी
गढ्ढे में धंसते हैं,
ये फ़रिश्ते रूपी हाथ
हमें निकाल लेते हैं
हमार लिए
नववर्ष का तोहफा यही है ।

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